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time:2021-10-25 02:52:41 गोयल ने कहा, कपड़ा मशीनरी क्षेत्र आयात पर निर्भरता घटाए Views:4591

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नयी दिल्ली, 24 अक्टूबर (भाषा) केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने कपड़ा मशीनरी क्षेत्र से आयात पर निर्भरता घटाने को कहा है। उन्होंने कपड़ा मशीनरी क्षेत्र में 100 ‘चैंपियनों’ के विकास पर जोर देते हुए कहा कि कपड़ा इंजीनियरिंग उद्योग तथा सरकार के सम्मिलित प्रयासों से क्षेत्र की आयात पर निर्भरता को कम किया जा सकता है।

वाणिज्य एवं उद्योग, कपड़ा, उपभोक्ता मामले तथा खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्री ने शुक्रवार को कपड़ा मशीनरी विनिर्माताओं के साथ वीडियो कॉन्फ्रेंस के दौरान यह बात कही।

उन्होंने कपड़ा मशीनरी विनिर्माताओं से कहा कि वे पहले से तैयार सुविधाओं के जरिये काम करें और क्षेत्र को गतिशील बनाएं।

विदेशों के 15 कपड़ा मशीन विनिर्माता, 20 घरेलू विनिर्माता और सात कपड़ा मशीनरी और संबद्ध उद्योग के संघ इस परिचर्चा में शामिल हुए।

इस परिचर्चा का मकसद मेक इन इंडिया कार्यक्रम के तहत देश में कपड़ा इंजीनियरिंग उद्योग की वृद्धि के लिए पारिस्थितिकी तंत्र का विकास करने की संभावित रणनीति बनाना था।

गोयल ने कहा कि राष्ट्रीय पूंजीगत सामान नीति विनिर्माण क्षेत्र की नीति है। सरकार ने पूंजीगत सामान के उत्पादन को 2025 तक 101 अरब डॉलर पर पहुंचाने के लिए यह नीति बनाई है। पूंजीगत सामान का उत्पादन मूल्य के हिसाब से 2014-15 में 31 अरब डॉलर था।

गोयल ने कपड़ा उद्योग से नवोन्मेषण वाली भागीदारी करने को कहा। एक बयान में कहा गया है कि गोयल ने भारतीय कपड़ा मशीनरी क्षेत्र में 100 अग्रणी इकाइयों के विकास पर जोर दिया, जिनकी दुनियाभर में पहचान हो।

मंत्री ने कहा कि भारत को कपड़ा मशीनरी उत्पादन के क्षेत्र में वैश्विक खिलाड़ी बनने का प्रयास करना चाहिए। गुणवत्ता और मात्रा के हिसाब से ऐसी मशीनरी का उत्पादन करना चाहिए, जिनकी दुनिया को जरूरत है।

गोयल ने कहा, ‘‘हम आयात के खिलाफ नहीं हैं, लेकिन कपड़ा मशीनरी उद्योग तथा सरकार के सम्मिलित प्रयासों से आयात पर निर्भरता कम करने की जरूरत है। यदि हम गुणवत्ता पर ध्यान देते हैं, तो बड़े बाजारों में पकड़ बना सकते हैं और ऊंची उत्पादकता हासिल कर सकते हैं।’’

उन्होंने कहा कि आधुनिक और उन्नत कपड़ा मशीनरी पारिस्थितिकी तंत्र से देश के असंगठित कपड़ा उद्योग को भी फायदा होगा।

(This story has not been edited by economictimes.com and is auto–generated from a syndicated feed we subscribe to.)
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