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Publishing time:2021-10-23 12:39:04

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Coal Shortage: क्रिसिल की रिपोर्ट से हुआ खुलासा, कोयले की कमी से जूझ रहे हैं देश भर के पावर प्लांट, जानिए अभी कैसे हैं हालात

Story outline

  • कोल इंडिया रेकॉर्ड कोयले का प्रोडक्शन कर रही है, लेकिन देश में बहुत से पावर प्लांट्स को कोयले की कमी की दिक्कत झेलनी पड़ रही है
  • क्रिसिल की एक रिपोर्ट से पता चला है कि 73 फीसदी पावर प्लांट के पास तो करीब 5 दिन का ही कोयला स्टॉक में बचा है
  • कुछ राज्यों में तो कोयले की इतनी अधिक दिक्कत हो रही है कि वहां पर बिजली की कटौती अब आम बात हो गई है
नई दिल्ली
Coal Shortage: कोयले का उत्पादन करने वाली सरकारी कंपनी कोल इंडिया रेकॉर्ड कोयले का प्रोडक्शन कर रही है, लेकिन देश में बहुत से पावर प्लांट्स को कोयले की कमी की दिक्कत झेलनी पड़ रही है। क्रिसिल की एक रिपोर्ट से पता चला है कि 73 फीसदी पावर प्लांट के पास तो करीब 5 दिन का ही कोयला स्टॉक में बचा है। इसमें यह भी कहा गया है कि 165 गिगावॉट की क्षमता वाले 135 प्लांट (70 फीसदी) ऐसे हैं जिनके पास 10 दिन से भी कम का कोयला बचा है।

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कुछ राज्यों में तो कोयले की इतनी अधिक दिक्कत हो रही है कि वहां पर बिजली की कटौती अब आम बात हो गई है। इसकी वजह से बहुत सारी मैन्युफैक्चरिंग यूनिट्स को अपने ऑपरेशन अस्थाई रूप से बंद करने पड़े हैं। अक्टूबर में तो ये समस्या और भयावह हो गई है, क्योंकि बेद कम दिन के कोयले के स्टॉक वाले प्लांट्स की संख्या महीने भर में करीब 25 फीसदी बढ़ गई है।

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अभी क्या है स्टॉक की हालत?
सेंट्रल इलेक्ट्रिसिटी अथॉरिटी की तरफ से जारी ताजा आंकड़ों के अनुसार 59 नॉन-पिट हेड प्रोजेक्ट्स के पास 4 दिन से भी कम का स्टॉक बचा है। 20 अक्टूबर के आंकड़ों के अनुसार महज 1 दिन के स्टॉक वाले प्लांट्स की संख्या 21 है, जिसकी क्षमता 25,810 मेगावॉट की है। देखा जाए तो स्थिति पहले से कुछ बेहतर हुई है, क्योंकि 13 अक्टूबर तक 36,140 मेगावॉट की क्षमता के साथ 27 प्रोजेक्ट ऐसे थे, जिनके पास सिर्फ 1 दिन का स्टॉक बचा था। बात अगर 2 दिन के कोयले के स्टॉक वाले प्लांट्स की करें तो इनकी संख्या हफ्ते भर पहले 20 थी, जो अब घटकर 18 रह गई है।

एक्सपर्ट्स की मानें तो ठंड आने के साथ ही बिजली की मांग में कुछ कमी आएगी। उन्हें उम्मीद है कि आने वाले दिनों में तमाम प्लांट्स में कोयले की समस्या में सुधार देखने को मिलेगा, क्योंकि सरकार की तरफ से सप्लाई को बढ़ाने की पूरी कोशिशें की जा रही हैं। अगस्त में ही केंद्र की तरफ से एक कोर मैनेजमेंट टीम का गठन किया गया है जो बेहद गंभीर स्थिति में पहुंच चुके प्लांट्स को कोयले की सप्लाई सुनिश्चित करने में मदद करती है।

बिजली की मांग बढ़ना अच्छा संकेत या बुरा?
ऊर्जा मंत्री आरके सिंह ने तमाम पावर प्लांट में कोयले की कमी की खबरों को गलत बताते हुए कहा कि बिजली की मांग में तेजी आना एक अच्छा संकेत है। उन्होंने कहा कि कोरोना की दूसरी लहर के पास बिजली की मांग बढ़ना अर्थव्यवस्था की रिकवरी के लिए एक अच्छा संकेत है। हालांकि, पावर प्लांट स्टॉक मेंटेन करने में काफी संघर्ष कर रहे हैं।

सितंबर से 5 सालों में उच्च मांग के साथ बिजली की डिमांड में तेजी से सुधार हुआ। मासिक वृद्धि औसतन लगभग 4 प्रतिशत रही। आधार मांग में साल-दर-साल 13 फीसदी की वृद्धि दर्ज की गई है। पिछले दो सालों में आधार मांग में अस्थिरता भी तेजी से बढ़ी है और चरम मांग वृद्धि लगभग 15 प्रतिशत अधिक रही है, जबकि अस्थिरता भी बढ़ी है।

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वैश्विक कोयले की कीमतों में बढ़ोतरी के कारण उसके आयात में आई गिरावट से भी पावर प्लांट्स को दिक्कतें हुई हैं। कोयले की सप्लाई कम होने से कई शहरों में 14 घंटे तक की बिजली कटौती देखने को मिल रही है। वहीं दुनिया का सबसे बड़ा कोयला उत्पादक कोल इंडिया अभी भी रेकॉर्ड कोयले का प्रोडक्शन कर रहा है।

कोयला आधारित ऊर्जा पर बढ़ी हुई निर्भरता
क्रिसिल की रिपोर्ट के अनुसार अप्रैल-सितंबर के दौरान बिजली की मांग में आई बढ़ोतरी को काबू नहीं किया जा सका, क्योंकि इसे अलग-अलग सोर्स में बराबर बांटा नहीं गया था। जहां एक ओर कोयले से बिजली बनाने में साल-दर साल के आधार पर 19.1 फीसदी की तेजी देखी गई, वहीं बाकी तरीकों से बिजली बनाने में 15.5 फीसदी की गिरावट देखने को मिली। हाइड्रो, गैस और न्यूक्लियर सोर्स से बिजली पैदा करने में भी गिरावट देखी गई, जहां से कुल बिजली का करीब 16-17 फीसदी हिस्सा आता है।

राज्यवार कोयले की समस्या
कोलये की समस्या सबसे अधिक बिहार, कर्नाटक, महाराष्ट्र और राजस्थान में देखने को मिल रही है। महाराष्ट्र में तो कोयले की कमी की वजह से 13 पावर प्लांट बंद करने की नौबत आ चुकी है। बिहार में कुछ जिलों में पावर प्लांट हर रोज 4-8 घंटे तक की बिजली कटौती कर रहे हैं। बेंगलुरु में 12-13 अक्टूबर तक बिजली की भारी समस्या रही। राजस्थान में शहरों में 1 घंटे और गांवों में 4-6 घंटे तक बिजली कटौती का सिस्टम शुरू कर दिया गया है। उत्तर प्रदेश के कुछ गांवों में दिन के 24 घंटों में से 10-15 घंटे ही बिजली आ रही है।

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जून में गिरावट के बाद पिछले दो महीनों में एक्टिव जॉब ओपनिंग्‍स में 74 फीसदी की बढ़त दर्ज की गई है. कंपनियों को कोविड की महामारी खत्‍म होने के बाद प्रतिस्‍पर्धा बढ़ने की उम्‍मीद है. वे इसके लिए खुद को तैयार रखना चाहती हैं.सितंबर में समाप्त तिमाही में कंपनी के कर्मचारियों की संख्या 2,40,208 थी. कंपनी अपने जूनियर कर्मचारियों को तीसरी तिमाही में एकबारगी विशेष प्रोत्साहन देगी.अच्‍छे इंक्रीमेंट के लिए अभी दो साल करना पड़ेगा इंतजार : एक्‍सपर्ट्स

नयी दिल्ली, 22 अक्टूबर (भाषा) दूरसंचार विभाग ने संचार नेटवर्क के क्रियान्वयन को आसान बनाने के लिए संशोधित नियमों को अधिसूचित किया है। इसके तहत ऊपर से तार बिछाने के लिए 1,000 रुपये प्रति किलोमीटर का एकमुश्त शुल्क तय किया गया है और प्रशासनिक तथा बहाली शुल्क के अलावा अन्य सभी शुल्क से राहत दी गयी है। अधिसूचना के अनुसार, ऊपर से दूरसंचार तार ले जाने के लिए दस्तावेज के मामले में भी राहत दी गयी है। एक आधिकारिक बयान में कहा गया, ‘‘केंद्र सरकार ने भारतीयकोरोना वायरस महामारी के चलते लागू किए गए लॉकडाउन के कारण विभिन्न क्षेत्रों में छंटनी, वेतन में कटौती या कर्मचारियों के वेतन में बढ़ोतरी रुक गई है. हालांकि, कई बड़े निजी क्षेत्र के बैंकों ने कर्मचारियों के वेतन में बढ़ोतरी की है.एसजेवीएन उत्तराखंड में जलविद्युत परियोजनाओं में निवेश को इच्छुक

नयी दिल्ली, 22 अक्टूबर (भाषा) बिजली उत्पादक कंपनी एसजेवीएन उत्तराखंड में जलविद्युत परियोजनाओं में अधिक निवेश करने को इच्छुक है। कंपनी के एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार, जून 2022 तक 60 मेगावाट की नैटवर मोरी जलविद्युत परियोजना को पूरा होने की उम्मीद है। एसजेवीएन पनबिजली, पवन, सौर और तापीय क्षेत्र में काम कर रही है। कंपनी ने शुक्रवार को एक बयान में कहा, ‘‘एसजेवीएन के अध्यक्ष और प्रबंध निदेशक नंद लाल शर्मा ने देहरादून में उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से मुलाकात की। बैठक के दौराननयी दिल्ली, 22 अक्टूबर (भाषा) पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने शुक्रवार को कहा कि सऊदी अरब और अन्य देशों से बेहतर कीमत पर कच्चे तेल का आयात करने के लिए भारत सरकार सार्वजनिक उपक्रमों और निजी क्षेत्र की रिफाइनरी कंपनियों को एक साथ लाने पर विचार कर रही है। उन्होंने कहा कि देश इस समय ईंधन की रिकॉर्ड कीमतों से जूझ रहा है, और ऐसे में संयुक्त खरीद से बेहतर मोलतोल की ताकत आएगी तथा आयात बिल में कटौती करने में मदद मिलेगी। मंत्री ने कहा कि उनके मंत्रालय के सचिव ने इस संबंध में सार्वजनिक और निजी रिफाइनरियों केक्‍या आप एमबीए करना चाहते हैं? ये 6 बातें करेंगी आपकी मदद

स्रोत: Nanfang Daily Online    Editor in charge: hit


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